जिम्मेदार कौन……?

25 फरवरी

 -सप्ताह में भारतीय ९० घंटे काम करता है और अंग्रेज सिर्फ ३० घंटे काम करता है

-भारतीय काफी मेहनतकश होते हैं, कामचोर और आलसी नहीं होते हैं

-भारतीयों की प्रतिरोधक क्षमता बहुत अधिक होती है, इसीलिये भारतीय बीमार नहीं होते हैं

-भारतीय अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बचत करते हैं

-भारतीयों का अपना एक सांस्कृतिक मूल्य होता है

-भारतीयों का दिमाग बहुत तेज होता है

-भारतीयों में शील, गुण, क्षमा,दया,परहित, सेवाभाव, दानशीलता, संभव आदि जैसे मानवमुल्य गुण होते हैं

-भारतीयों में पारिवारिक जीवन का बड़ा महत्व है

-भारतीय सामाजिक होते है और बड़े ही धार्मिक होते है और दुसरे धर्मो की इज्जत करते हैं

-भारतीय सर्वधर्मसमभाव को अपनाये हुए हैं -आजतक भारतीयों ने किसी धर्म को नहीं मिटाया और ना ही मिटाने की सोच रखी

-भारतीय हमेशा ही दया और क्षमाके समर्थक रहे हैं

-भारतीयों ने आयुर्वेद और योग का प्रयोग किया जो बीमार ही नहीं होने देती

-भारत में दया और दान के बराबर कोई तप नहीं है, ऐसी द्रूढमान्यता है

-भारत एक बहुत ही विशाल और विविधता वाला महान देश है, जहा पर कृषि और श्रम मुख्य धनार्जन के श्रोत है

फिर भी आखिर क्यों एक पौंड में ८०-९० रुपये ? एक डालर में ४७ रुपये ?

“ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर अग्रीमेंट” के समय (१५ अगस्त १९४७) एक रुपये एक डालर मिलता था…!! इसके बावजूद आज भी हमारे रुपये की इतनी कम कीमत क्यों है ?

इसके लिए जिम्मेदार कौन ? क्या हमारे नेता ? शायद वे और उनकी वोट बेंक नीति…….

स्वदेशी को हमेशा दबाना, जिससे विदेशी कंपनिया खूब बिजिनेस करे…!!

स्वदेशी चीजो प्रचार नहीं होने देना और आयुर्वेद और योग को नीचा दिखाना…!!

विदेशी उत्पादों जैसे पेप्सी कोला आदि को बढ़ावा देना और स्वदेशी चीजो की जांच करवाना …..!!

कहीं आनेवाला कल हमारे बच्चो पर भारी न पड़े……

ये देश हर वर्ष आजादी मनायेगा

अपनी झूठी शान दिखायेगा और

भारत का बचपन यूं ही भूखे पेट सो जायेगा……!!

भारत माता की जय ….

कमलेश अग्रवाल

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2 Responses to “जिम्मेदार कौन……?”

  1. mahatammishra फ़रवरी 26, 2013 at 6:59 पूर्वाह्न #

    कमलेश जी आप ने भारतीयों के सारे गुण का बयान किया लेकिन उनके मुख्य गुण कों छोड़ दिया है शायद लोगों कों समझने के लिए, सही किया आप ने गुण का गुणगान होता है अवगुण का नहीं……जय हों…..

  2. kamlesh फ़रवरी 27, 2013 at 7:01 पूर्वाह्न #

    मिश्राजी,
    हमें तो अपनी प्रसंशा ही करनी है…!! अवगुण तो कहां पीछे रहते हैं…!! टिप्प्णी के लिये शुक्रिया…

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