Archive | दिसम्बर, 2013

क्या सेवा लघुता की शिकार हो गई है ?

31 दिसम्बर

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने लोक सेवकों को नसीहत दी थी कि हम अपने कुटुम्बों के लिए मरना जानते हैं किन्तु अब कदम आगे बढ़ाने होंगे । हमें अपनी सेवा का वृत्त इतना फैलाना पड़ेगा कि सारा गांव उसमें समा जाए। फिर जिला, प्रांत, देश को छूते हुए संपूर्ण जगत को हम अपनी सेवा से लिप्त कर दें।

देखा जाये तो हम भारतवासी विनम्र सेवक हैं। क्योंकि भारत की संस्कृति में सेवा करना एक पुण्य का काम माना जाता रहा  है। अगर हम चाहते हैं कि विश्व की स्थिति सुधर जाये, परस्पर भाईचारे की भावना हर व्यक्ति में पनपे  और इस पृथ्वी पर स्थित राष्ट्रों के पारस्परिक राग-द्वेष समाप्त हो जाये तो हमें सर्व प्रथम हर एक व्यक्ति में खुद को देखना होगा ।

वैसे देखा जाए तो किसान, मजदूर, कारीगर, व्यापारी, शिक्षक, चिकित्सक, वैज्ञानिक आदि  जनता-जनार्दन के सेवक ही हैं। लेकिन अधिक पाने की इच्छा ने उन्हें सेवा के पथ से पथ-भ्रष्ट कर दिया है । इन लोगों के पास सेवा करने का दायरा बहुत बड़ा है; किंतु भौतिकता की चमक ने इन्हें स्वार्थी बना दिया है। 

आज सेवा होती है पर उस के पीछे छिपे उद्देश्य सही नहीं होते…!! लोकसेवा करके राजनीतिक पार्टियां रचा, सत्ता के दरवाजे पर दस्तक कैसे दी जाये, यही सोच इस सेवा के पीछे होती है। उनकी सेवा का साध्य सत्ता है। उनके द्वारा सत्ताधारी व सत्ताकांक्षी सेवा प्रकल्प खड़े किये जाते हैं।

सेवा क्षेत्र दो तरह के हैं- सरकारी और अ-सरकारी। सरकारी सेवा की नींव में कुर्सी पर डट्टे रहने का स्वार्थ है, अ-सरकारी सेवा की नींव में सामाजिक सहकार से आम लोगों को सुविधा पहुँचा ने की नेक भावना है।  शासक सत्ता का उपयोग अपनी सुविधा बढ़ाने में करता है जबकि सेवक की प्रवृत्तियों से जनता सुविधा पाती है। मतलब की दूनिया मतलब की ही रह गई है…सेवा आज लघुता की शिकार बनती जा रही है ।लोगों की सोच छोटी होती जा रही है…. ऐसे में ये पंक्तियां गाने को जी करता है…

”यह हवा बदलने की खातिर आंधी की आज जरूरत है,

लपटों पर बैठी दुनिया को गांधी की आज जरूरत है ।”

शायद केजरीवाल नये गांधी सिद्ध हो…!! भगवान करे कि इन की आम आदमी पार्टी का उद्देश्य कुर्सी का किस्सा न बने…!!

कमलेश अग्रवाल

आम आदमी का जवाब

28 दिसम्बर

एक बार दिल्ली के एक नेता ने अपने चाटूकारियों से प्रश्न किया, “बताओ सबसे अच्छा मौसम आप के हिसाब से कब माना जाये?”

सदैव नेता को प्रसन्न करके ईनाम पाने के लिए सभी चाटुकारी तैयार रहते हैं | उनमें से एक उठा और बोला, “ नेताजी सबसे अच्छा मौसम बसंत ऋतु में होता है? इस समय मंद-मंद हवा बहती है, रंग-बिरंगे फूल खिलते है, तापमान भी कम होता है तथा ठंडा मौसम सब को प्रसन्नता देता है|”

तभी एक और उठा और बोला, “नहीं नेताजी सबसे अच्छा मौसम सर्दी का होता है | इस समय हमें कई प्रकार की सब्जी मिलती है तथा कई प्रकार की बानगी खाने को भी मिलती है | इस मौसम में मूँगफली तथा गर्म कम्बल की गरमाहट अपने आप में एक गजब की मस्ती देती है|”

तभी एक अन्य ने बिच में टोकते हुए कहा, “नेताजी, गर्मी का मौसम ही सबसे अच्छा मौसम होता है | यह गर्म तो होता है परन्तु शाम को नौका विहार मन को प्रसन्न कर देता है |”

अब जवाब देने की बारी आम पार्टी के आम आदमी की थी वह उठा और बोला, “अरे नेताजी मैं बताता  हूं कि  सबसे अच्छा मौसम कब होता है ? अच्छा मौसम तब होता है, जब मनुष्य को उचित भोजन मिले | जब उसका पेट भरा हो| यदि कोई व्यक्ति भूखा होगा तो ठण्डी हवा भी उसे खुशी नहीं दे पायेगी| ठंड उसे काटेगी और , गर्मी तो उसे और अधिक बेहाल कर देगी | परन्तु यदि व्यक्ति का पेट भरा हो तो वह मौसम की बारिश ,सर्दी की ठण्डी हवा तथा गर्म कपड़ो का आनंद ले सकता है | एक भूखे पेट व्यक्ति को भोजन के अतिरिक्त कुछ और सोच ने को रहता ही कहां है ?”

दिल्लीवाले एक बार फिर आम आदमी पार्टी के आम आदमी की चतुर हाजिर जवाबी से चकित रह गए और उन्हों ने उस आम आदमी पार्टी को अपने यहां सरकार बनाने का न्योता दे ही दिया…

ये भी क्या खूब रही…..अब तो मौसम अच्छा ही रहना है….क्यों आप का क्या ख्याल है ?

 कमलेश अग्रवाल

वक्त आ ही गया बिदा करने का…..

28 दिसम्बर

वैसे तो मेरे लिये मेरी दोनों बेटियां मेरी दो आंखे ही हैं पर मेरा व मेरी बेटी निधि का रिश्ता कुछ ज्यादा ही गहरा है। निधि से मेरा लगाव होना भी स्वाभाविक है क्योंकि जब वह पैदा हुई तो बहुत ही कमजोर थी। इतना ही नहीं दूसरी बेटी होने के कारण मेरी सास भी खुश नहीं थीं। उन की नाराजगी की वजह मैं समझ सकती थी क्योंकि वे भी सात-सात बेटियों की मा जो थीं….!! मैं उन की नाराजगी  बखूबी समझ गई थी। शायद यही वजह रही कि मैं निधि से काफी जूड़ी रही।

मुझे याद है जब निधि के होने पर दाई को इन्होंने 100 का नोट पकड़ाया, जिसे देख वह दाई असमंजस में पड़ गई थी। उसे तो लगा होगा कि चाय-पानी के पैसे भी मिलेंगे या नहीं..!! पर ये देख मैं बहुत खुश थी क्योंकि मन में तसल्ली हो गई थी कि इन्हें दूसरी बेटी आने का कोई खेद नहीं है….

वक्त गुजरता चला गया। नेहा बड़ी बेटी होने के कारण निधि का बड़ा ही ध्यान रखती। इधर हम दोनों अपने-अपने काम में व्यस्त रहते। शाम को दोनों के साथ समय बिताते। धीरे-धीरे दोनों बड़ी होती चली गई। हमारी फुलवारी की कलियां फूल बन चूँकि थीं । पहले नेहा और दो-तीन साल के बाद निधि पढ़ाई के लिये बाहर चली गई। नेहा के जाने पर ज्यादा खला नहीं था क्योंकि वह ज्यादा दूर नहीं गई थी। उस की कालेज जाने में दो-ढाई घंटे ही लगते थे सो जब उस से मिलने को दिल करता था तब हम अपनी गाडी उठा चल देते थे । और दूसरी बात यह भी थी कि निधि हमारे पास थी; पर जब निधि का चयन दिल्ली के सेंट स्टिफन कालेज में हुआ तो लगा जैसे जिंदगी थम सी गई है…!! चार साल उसे वहीं रहना होगा यह सोच-सोच कलेजा मुँह को आ रहा था । फिर मन को ये कह समझाया कि बच्चों के केरियर के लिये ये तो सहना ही होगा ।

बस उस के बाद से दोनों बेटियां हम से दूर ही रहीं..!! पहले पढ़ाई के चलते और बाद में नौकरी के लिये ।धीरे-धीरे वक्त आ ही गया नेहा को ससुराल भेजने का । लड़का उस के पसंद का था ।

बस तीन साल नेहा की शादी के हुए और हमने निधि की शादी का भी मन बना लिया । मैं ने उस से पूछा कि अगर तुम्हारी निगाह में भी कोई लड़का हो तो कह दो ताकि हम न ढूंढे । 18 नवम्बर 2013 के दिन निधि भी बिदा हो चली । अब हम दोनों अकेले रह गये हैं…वैसे तो पहले भी कई सालों से अकेले थे पर बेटियों को ससुराल भेजने के बाद अकेलेपन का अहसास कुछ और ही होता है…!! हालांकि दोनों ही बेटीयां इस बात का पूरा खयाल रखती हैं कि हमें उन की गैरहाजिरी महसूस न हो..!! रोजाना उन से फोन पर बातचीत जो होती रहती है ।

बेटियों की बिदाई के बाद महसूस हुआ कि बेटियां पराई होते हुए भी कभी पराई नहीं होतीं..!! जब वे पढ़ाई व नौकरी के कारण बाहर थीं तब जितनी करीब नहीं थीं उस से कही गुना करीब ब्याह के बाद वे हो गई हैं । हम इतने खुश किस्मत हैं कि दो बेटियों के साथ दो बेटों के भी हम अभिभावक बन गये हैं । बेटियों का जिक्र आते ही आँखे भर आती हैं और आँखों में उमड़-घुमड़कर आती है वो मधुर स्मृतियाँ, जो हमें उन की मीठी और बीती यादों से जोड़ देती हैं। 

कमलेश अग्रवाल

बेचारा दिल….!!

27 दिसम्बर

44 वर्षिय आनंद का वजन अचानक बढ़ने लगा था । उन्हें करीबी रिश्तेदारों और मित्रों ने जिम जाने की सलाह दी । उन्हों ने जिम जाना शुरु किया पर व्यायाम करते समय उन्हें काफी असहजता महसूस होती रही पर ये सोच कर व्यायाम को करना उन्होंने जारी रखा कि अभी उन्हें व्यायाम की आदत नहीं पड़ी है शायद धीरे-धीरे आदत हो जायेगी । लेकिन समय के साथ-साथ उनकी समस्या बढ़ती गई।

डॉक्‍टर को दिखाने पर पता चला कि आनंद को उच्‍च रक्‍तचाप है और कोलेस्‍ट्रॉल भी काफी ज्यादा है । हालांकि उच्‍च रक्‍तचाप, डायबिटीज और मोटापे को लेकर आनंद का कोई पारिवारिक इतिहास नहीं था । होता तो शायद वह इस बात को लेकर बेफिक्र न होता । डॉक्‍टर ने एंजियोग्राफी करवाने की सलाह दी । एंजियोग्राफी कराई तो एक चौंका ने वाले सच से उसका सामना हुआ । उसे पता चला कि उसकी 4 हृदय धमनीयों में करीब 70-90 फीसदी रुकावट है…!!

आनंद की ही तरह ऐसे कई व्यक्ति हैं, जो इस तथ्‍य से अनजान हैं कि वे हृदय रोगों के आसानी से शिकार बन सकते हैं । देखा गया है कि कई समस्‍याओं का मूल कारण हमारी खुद की अव्यवस्थित जीवनशैली ही होती है । नौकरी पर तनाव, काम के लंबे घंटे, बाहर भोजन करना, भोजन का सही समय न होना, शारीरिक महेनत में कमी और अपने शरीर के प्रति लापरवाह रवैया । बेचारे दिल को इस बेदरकारी का खामियाजा भुगतना पड़ता ही है । इन आदतों के चलते बेचारे दिल को कई बार घातक परिणाम भुगतने पड़ते हैं ।

आनंद से एक मित्र होने के कारण मैं ने जब उस से विस्तृत बात की तो पता चला कि कई दिनों से उसे सांस लेने में दिक्कत आ रही थी । छाती में हलका सा दर्द महसूस हो रहा था पर ये सोचकर कि शायद मस्क्युलर पैन होगा, उस ने इस बात को गंभीरता से नहीं ली । दिल के डॉक्‍टरों का कहना है कि अगर…..

 सांस रुक-रुक कर आये

घबराहट महसूस हो

छाती, बाजू और कलाई में दर्द सा महसूस हो

गले में कुछ फंसा हुआ महसूस हो तो……

आप तुरंत घरवालों से जिक्र करें ताकि आप को समय रहते मेडीकल सुविधा मिल पाये और बेचारे दिल को भुगतना न पड़े…!!  

आनंद अब अपने आहार पर बहुत ध्यान देने लगा है । उस ने सिगरेट पीना छोड़ दिया है । तम्‍बाकू वाला पान खाने की कसम ले ली है..!! इतना ही नहीं अब वह नियमित रुप से रक्‍तचाप की जांच भी करवाने लग गया है । किसी ने सच ही कहा है,” दूध का जला पानी भी फूंक-फूंक कर पीता है” ।

अच्छी बात आनंद के लिये यह रही कि एक सप्ताह में ही उस ने आपरेशन करवाने का निर्णय ले लिया । सही निर्णय के चलते वह आज सामान्‍य जीवन व्‍यतीत कर रहा है । दिल हमारे शरीर के पांच महत्त्वपूर्ण अंगों में से एक है और हमें इसकी देखभाल करनी चाहिए । यदि आपको दिल की कार्यप्रणाली में किसी भी प्रकार की अनियमितता नजर आए तो बिना देर किए डॉक्‍टर से संपर्क करना चाहिए । व्‍यक्ति को दिल की सेहत के लिए सभी जरूरी कदम उठाने चाहिए । नियमित चेकअप और डॉक्‍टरी सलाह आपके जीवन का हिस्‍सा होनी चाहिए । ताकि आप का दिल खुश और मजबूत रहे । उसे बेचारा कभी न होने दें,……

कमलेश अग्रवाल